दी बड़ी हिदायत सबको उसने, एक दिन वो कलयुग आएगा |
और रंक बनेगा राजा एक दिन, राजा फिर दुखड़े गायेगा ||
नर भोग्य सह भोग्य है जीवन का, ऐसे-कैसे बिसरायेगा |
जिसने जैसा है कर्म किया, वह यही भोग कर जायेगा ||
ना समय किसी को रोक सका है, न रोक समय को कोई पायेगा |
ये तो नदियां की धारा है, बस ये निरंतर ही बहता जायेगा ||
हो अश्वनी काल की माया या, चाहे फिर हो मौसम पतझड़ का |
जीवन के आखरी पल हो या, दिन हो सबके बचपन का ||
जो बीत गया वो मिल ना सकेगा, फिर क्यों तू आँशु बहायेगा |
और अहंकार के विवश हो कर, जो है वो भी खो जायेगा ||

Jyoti Gupta
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