यौवन के चौखट पर खड़ी लड़की

काला-गोरा क्या भेद है, ये समाज मुझको बतलाती है।
जब पिता जी के कहने पर, मुझे जमात देखने आती है।।

रंग काला है कद छोटा है, और बालों का रंग भी सुनेहरा है।
कैसे ले ले तुम्हारी बेटी, जब जेब में तुम्हारे ना पैसा है।।
तू देख मेरा आडम्बर ऊँचा, क्या ऊँचा महल बनाया है।
अब कुछ तो समझो समधी जी, लड़के पर पैसा बहुत लगाया है।।
ये हाल जो देखूं हर घर का, चर्चे मुझको बतलाती है।
काला गोरा क्या भेद है, ये समाज मुझको बतलाती है।।

उम्र बढ़ रही लड़की की ये दुनियां सब बतलाती है।
यौवन के चौखट पर खड़ी लड़की, कहा संभाली जाती है।।
मैं अपने मुख से नहीं कहता, ये बात तो सदियों पुरानी है।
जब-जब लड़की की शादी हुई, लड़को ने ही की मनमानी है।।
मैं मुड़ कर देखूं जब सखियों को, उनके चहरे बतलाती है।
काला गोरा क्या भेद है, ये समाज मुझको बतलाती है।।

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ज्योति गुप्ता
jcreativesilverproduction@gmail.com

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